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पर्यावरण की बात करने नाव से दो हफ्ते समंदर पारकर न्यूयॉर्क पहुंची 16 साल की लड़की
पर्यावरण की बात करने नाव से दो हफ्ते समंदर पारकर न्यूयॉर्क पहुंची 16 साल की लड़की
Date : 30-Aug-2019

सोलह साल की थुनबर्ग और नाविक दल के सहयोगियों को मैनहट्टन के मैरीन पर शाम चार बजे ले जाया गया। इंग्लैंड के प्लाइमुथ से दो हफ्ते में थुनबर्ग यहां पहुंची हैं। हडसन नदी के किनारे सैकड़ों पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। थुनबर्ग ने हाथ हिला कर लोगों का अभिवादन किया और सूखी जमीन पर अपने पांव रखे। इतने सारे लोगों को देख थोड़ी असहज दिख रहीं थुनबर्ग ने कहा, सब कुछ बहुत जबर्दस्त है।

थुनबर्ग ने कार्बन उत्सर्जन को बचाने के लिए विमान से न्यूयॉर्क जाने से मना कर दिया। पत्रकारों से बातचीत में थुनबर्ग ने कहा कि यह यात्रा उतनी कष्टदायी नहीं  थी जितना उन्होंने सोचा था हालांकि उन्होंने जोर दे कर कहा, मैं नहीं चाहती कि हर किसी को ऐसा करना चाहिए। यह पागलपन है कि 16 साल की लड़की को किसी बात के समर्थन के लिए अटलांटिक सागर को पार करना पड़ा। थुनबर्ग का कहना है, जलवायु और पारिस्थितिकी का संकट एक वैश्विक संकट है, यह मानवता के लिए अबतक का सबसे बड़ा संकट है और अगर हम अपने विरोधों के बावजूद साथ काम करने और सहयोग करने सामने नहीं आए तो हम नाकाम हो जाएंगे।

थुनबर्ग पर्यावरण के लिए काम करने वाले युवाओं के बीच एक बड़ा प्रतीक बन गई हैं। उन्होंने हर हफ्ते स्वीडन के स्कूल में पर्यावरण के लिए हड़ताल करने का अभियान शुरू किया जो अब दुनिया के 100 शहरों में फैल गया है। अगले महीने न्यूयॉर्क में होने जा रहे यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट एक्शन में भाषण देने के लिए वह यहां आई हैं। यहां वह दुनिया भर के नेताओं से मिलेंगी जो ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने के लिए योजना पेश करने वाले हैं।

थुनबर्ग को लेकर आने वाली नाव मैलिजिया टू को रास्ते में खराब मौसम का सामना करना पड़ा और एक दिन के लिए उसकी चाल काफी धीमी रही। करीब 60 फुट लंबी नाव को चलाने की जिम्मेदारी बारी बारी से बोरिस हरमन और पियर कासिराघी ने उठाई जो मोनॉको के स्वर्गवासी प्रिंस राइनर तृतीय और अमेरिकी अभिनेत्री ग्रेस केली के पोते हैं।

यह कोई सुखद यात्रा नहीं थी। मैलिजिया को सागर तटों पर तेज रफ्तार वाली रेस के लिए तैयार किया गया है जिसका वजन बहुत कम है। इसमें टॉयलेट की जगह सिर्फ एक बाल्टी है और इसमें कोई शावर भी नहीं। डेक के नीचे कोई खिड़की नहीं है और बस एक छोटा सा गैसकुकर है जिस पर आप फ्रिज में रखे खाने को गर्म कर सकते हैं। नाव में लगी इलेक्ट्रॉनिक चीजों को सोलर पैनल और अंडरवाटर टरबाइन से ऊर्जा मिलती है।

एक अभिनेता और ऑपेरा सिंगर की बेटी थुनबर्ग यूरोप में तब मशहूर हुईं जब उन्होंने स्वीडन के आम चुनाव से कुछ हफ्ते पहले स्कूल जाना बंद कर दिया और जलवायु परिवर्तन के असर के बारे में प्रचार करने में जुट गईं। उन्होंने चुनाव के बाद भी हर शुक्रवार को स्कूल नहीं जाने का सिलसिला जारी रखा और फिर उनके साथ हजारों छात्रों ने इसे अपना लिया। थुनबर्ग इसके बाद अब तक पोप से मिली हैं, दावोस में भाषण दिया है और जर्मनी के कोयला विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हुई हैं। अब उन्होंने अपने अभियान के लिए स्कूल से एक साल की छुट्टी ले ली है।

अटलांटिक पार की यात्रा में उनके पिता भी उनके साथ आए। न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद थुनबर्ग से पूछा गया कि क्या वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोई संदेश देना चाहेंगी। जवाब में उनका कहना था, मेरा संदेश उनके लिए बस इतना है कि विज्ञान को सुनिए। जाहिर है कि वो ऐसा नहीं करते हैं। तो ऐसे में मेरे सामने यही सवाल होता है कि जब और कोई उन्हें जलवायु संकट, उसकी जरूरत  के बारे में नहीं समझा पा रहा है तो मैं ऐसा कैसे कर पाउंगी? तो मेरा ध्यान सिर्फ जागरूकता फैलाने पर है।(एपी)

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