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क्या है मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम
क्या है मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम
06-Jun-2020 12:17 PM

सऊदी अरब पर मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम वारयस या एमईआरएस का सबसे ज्यादा कहर टूटा है। सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 688 संक्रमित लोगों में से 282 लोगों को इस वायरस के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में एमईआरएस की चपेट में आने वाले यात्रियों के कारण वायरस यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका तक फैल चुका है। शोधकर्ताओं के अनुसार जानलेवा मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम वारयस ऊंटों से इंसानों तक फैलता है।  पुराने शोधों से यह पता चलता है कि यह वायरस ऊंटों में करीब 20 सालों से पाया जाता है और अब यह इंसानों तक पहुंचने की कोशिश में है।
गर्म इलाकों में पाए जाने वाले ऊंट एमईआरएस कोरोनावायरस के महत्वपूर्ण कुंड हो सकते हैं। यह वायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (सार्स) से जुड़ा हुआ है। यह 10 साल पहले पूर्वी एशिया में सामने आया था। तब इस वायरस का संक्रमण पशुओं से इंसानों में हुआ था और इसके कारण 800 से ज्यादा लोगों की जान गई। सार्स की तरह एमईआरएस में फेफड़ों का इनफेक्शन होता है। इसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। जिसमें बुखार, थकान, कफ, गला खराब जैसे सामान्य लक्षण होते हैं। इसका सामान्य लक्षण है 38 डिग्री (100 डिग्री फॉरेनहाइट) के ऊपर बुखार, बाद में सांस लेने में मुश्किल हो सकती है। एमईआरएस के कारण गुर्दा तुरंत नाकाम हो जाता है।
 

 

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