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आईएसआई और उसके प्रमुख रिजवान अख्तर
23-Sep-2020 2:22 PM 6
आईएसआई और उसके प्रमुख रिजवान अख्तर

इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (आईएसआई) पाकिस्तान की सबसे बड़ी इंटेलीजेंस (गुप्तचर) सेवा है। 1950 में पूरे पाकिस्तान की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा का जिम्मा आईएसआई को सौंप दिया गया। इसमें सेना के तीनों अंगों के अधिकारी मिलकर आईएसआई के लिए काम करते हैं। पूर्व में इसका मुख्यालय रावलपिंडी में था और इसे  इंटेलीजेंस ब्यूरो के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में आईएसआई का मुख्यालय इस्लामाबाद में है । वर्तमान में इसके स्टाफ में लगभग 25 हजार लोग हैं।
1947 में पाकिस्तान में दो मुख्य गुप्तचर एजेंसियां थी, इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई), पर 1947 में हुए भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई) सेना के तीन अंगों नेवी, आर्मी और एयरफोर्स के बीच सूचनाओं और व्यवस्थाओं के आदान-प्रदान में एकदम विफल रही। इस असफलता से एक नई एजेंसी की जरूरत महसूस हुई। नतीजतन 1948 में आईएसआई का गठन किया गया। आईएसआई की नींव ऑस्ट्रेलियाई मूल के ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर मेजर जनरल आर. कैथोम ने रखी थी जो उस समय पाकिस्तानी आर्मी स्टाफ के मुख्य थे।
 पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अर्धसैनिक रेंर्जस के प्रमुख रिजवान अख्तर को खुफिया विभाग आईएसआई का प्रमुख नियुक्त किया गया है। सिंध से पहले वह दक्षिण वजीरिस्तान में तैनात थे और उन्हें आतंकवादरोधी मसलों का जानकार माना जाता है। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि अख्तर की नियुक्ति से पाकिस्तान में चल रहे गतिरोध और सरकार और सेना के बीच संबंधों पर क्या असर पड़ेगा। 
श्री अख्तर 1982 में सेना में भर्ती हुए। उन्होंने क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से स्नातक किया है।  इससे पहले वह दक्षिणी प्रांत सिंध में अर्धसैनिक रेंजर्स के प्रमुख थे और कराची में तालिबान उग्रवादियों के खिलाफ अहम ऑपरेशन का नेतृत्व किया था।  इस अभियान से अपराध तो कम हुआ लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसकी बड़ी आलोचना की।  उनका कहना था कि इस अभियान के दौरान काफी अत्याचार किए गए। 
 पाकिस्तान में इंटर सर्विस इंटेलिजेंस आईएसआई की अहम जगह है। इसके हाथ में घरेलू नीतियों, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की और पाकिस्तान के विदेश नीति की डोर रहती है।  वैसे तो आधिकारिक तौर पर आईएसआई प्रमुख प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं लेकिन असल में उनका नियंत्रण पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल, यानी राहिल शरीफ के हाथ में है।  इस पद से पहले अख्तर ने इस्लामिक उग्रवादियों और आपराधिक गैंग के खिलाफ कराची में कार्रवाई की थी। 
 रिजवान अख्तर की नियुक्त एक ऐसे वक्त में आई है जब प्रधानमंत्री नवाज शरीफ एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।  पिछले कई हफ्तों से विपक्षी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ और मुल्लाह कादरी के समर्थक शरीफ के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 
 

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