सामान्य ज्ञान

क्या है सांसद आदर्श ग्राम योजना
22-Nov-2020 12:19 PM 56
क्या है सांसद आदर्श ग्राम योजना

अक्टूबर , 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की है। इसके तहत प्रत्येक सांसद वर्ष 2019 तक तीन-तीन गांवों के वास्तविक और संस्थागत बुनियादी ढांचे के विकास का जिम्मेदार होगा, मगर इनमें से एक गांव का विकास 2016 तक किया जाना है। इसके बाद प्रत्येक वर्ष में आदर्श ग्राम बनाने के लिए पांच गांवों का चयन 2024 तक विकास के लिए किया जाएगा। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर शुरू की गई योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत की आत्मा को जीवित करने के साथ गांववासियों को गुणवत्तापूर्ण मूल सुविधाएं प्रदान कराना और उन्हें अपना भाग्य स्वयं बनाने में सक्षम करना है। 
 इसमें चुने गए  गांवों में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण, कामधंधे आदि विभिन्न क्षेत्रों के समेकित विकास का प्रावधान है। बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा योजना लोगों की भागीदारी, अन्तयोदय, लिंग आधारित समानता, महिलाओं की गरिमा, सामाजिक न्याय, सामाजिक सेवा की भावना, सफाई, पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन, शांति और सद्भाव, आपसी सहयोग, आत्मनिर्भरता, स्थानीय स्वशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक जीवन में जवाबदेयता जैसे कुछ मूल्यों का गांव के लोगों में संचार करना है ताकि वे अन्य लोगों के लिए आदर्श बन सकें।  
सांसद आदर्श ग्राम योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य मजबूत और पारदर्शी ग्राम पंचायतों और सक्रिय ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय लोकतंत्र को सशक्त बनाना और सुशासन की दिशा में आगे बढऩा है।  इस योजना की धुरी सांसद होंगे।  योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में तीन हजार से पांच हजार संख्या की ग्राम पंचायत और पर्वतीय, जनजातिय और दूरदराज के क्षेत्रों में एक हजार से तीन हजार जनसंख्या की ग्राम पंचायतों का चयन किया जाएगा। जिन जिलों में जनसंख्या का आकार उपलब्ध नहीं होगा वहां लगभग वांछित जनसंख्या के आकार पर ग्राम पंचायतों का चयन किया जाएगा।


डी-मैट अकाउंट
यह एक प्रकार का बैंक खाता है, जिसमें रुपयों की जगह शेयर व बॉण्ड रखे जाते हैं। इस खाते में रुपए का लेन-देन नहीं होता है। अगर कोई व्यक्ति शेयर बाजार में निवेश करना चाहता है। तो उसे डी-मैट खाता खुलवाना जरूरी है। सेबी के नियमों के मुताबिक अगर आपको शेयर बाजार में खरीद-फरोख्त करनी हो, तो वह डी मैट खाते के जरिए ही हो सकती है। 
यही नहीं अगर किसी कंपनी के आईपीओ में निवेश करना हो, तो भी डी मैट खाता जरूरी है। डी मैट खाता खुलवाने पर बैंक या ब्रोकर पैसा लेता है। यह खाता शेयर के न होने पर बंद नहीं होता है। इसके लिए वार्षिक फीस चुकानी पड़ती है।
 

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