राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रेल यात्रियों को क्वारंटीन से छूट?
10-Apr-2021 5:30 PM (103)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रेल यात्रियों को क्वारंटीन से छूट?

रेल यात्रियों को क्वारंटीन से छूट?

रायपुर, बिलासपुर के हवाईअड्डों में उतरने वाले यात्रियों को अब 72 घंटे पहले का आरटीपीसीआर कोविड टेस्ट रिपोर्ट दिखाना जरूरी कर दिया गया है। एक सामान्य धारणा यह बन रही है कि दूसरे राज्यों से पहुंचने वाले यात्रियों के कारण छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमितों की संख्या में एकदम से उछाल आया है। इसलिये ऐसा कदम प्रत्याशित था। हालांकि इसमें कुछ देर कर दी गई। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच अंतर्राज्यीय बस सेवा तो पहले से ही बंद कर दी गई है। राज्य की सीमाओं पर चेकिंग की जा रही है। इधर लोग भी मुख्य मार्ग के बजाय गांवों के रास्ते एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा पार कर रहे हैं।

इस आदेश में कहा गया है कि जो लोग टेस्ट रिपोर्ट लेकर नहीं आयेंगे उनका हवाईअड्डे पर ही टेस्ट किया जायेगा। पॉजिटिव ही नहीं, निगेटिव होने पर भी उन्हें सात दिन स्वयं के व्यय पर क्वारंटीन पर रहना होगा। सडक़ मार्ग की यात्रा करने वालों को यह छूट तो दी गई है कि वे किसी जरूरी काम से किसी शहर में एक दो दिन के लिये दूसरे प्रदेश से आये हैं तो बिना क्वारंटीन हुए लौट सकते हैं पर हवाई यात्रा करने वालों के बारे में निर्देश में कुछ नहीं है।

बीते साल जब कोरोना का संक्रमण फैला तो हवाई सेवायें लम्बे समय तक बंद रहीं, ट्रेनें भी ठहर गईं। बाद में फंसे यात्रियों को मंजि़ल तक पहुंचाने के लिये ट्रेनें चलाई गई थीं। तब स्टेशन पर एक-एक यात्री का टेस्ट किया गया और क्वारंटीन अनिवार्य किया गया। पिछले अप्रैल माह के मुकाबले छत्तीसगढ़ में ही इस बार कई गुना अधिक केस हैं। पर दूसरे राज्यों से पहुंच रहे रेल यात्रियों के लिये हवाई या बस यात्रियों की तरह कोई बंदिश नहीं है। रेल यात्रियों के लिये अब तक कोई निर्देश जारी नहीं हुआ कि दूसरे राज्यों से आने वाले अपना अनिवार्य टेस्ट करायें और क्वारंटीन पर रहें, जबकि  स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढऩे के बाद अधिकतर लोग ट्रेन से एक से दूसरे राज्य आना-जाना कर रहे हैं। राजस्थान सरकार ने रेल यात्रियों के लिये कोविड निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य किया है तो तमिलनाडु ने ई पास को जरूरी किया है। जहां आदेशों और जुर्माने के बावजूद सोशल डिस्टेंस और मास्क के निर्देशों का पालन कराना मुश्किल काम हो, वहां रेल यात्रियों से भी उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे सख्त आदेश और निगरानी के बिना ही अपनी जिम्मेदारी से कोविड टेस्ट कराएं और क्वारंटीन हो जायेंगे। 

परीक्षा के लिये यह भी एक सुझाव..

माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा आखिर स्थगित कर दी गई है। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर पालक एक तरफ जहां निश्चिन्त हुए वहीं दूसरी ओर बोर्ड परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर आये ठहराव ने उन्हें चिंता में भी डाल दिया। ज्यादातर बच्चों ने पूरा साल घर में बिताया, झुंझलाए पालकों ने फीस पूरी पटाई। बच्चों की मानसिक स्थिति को समझना होगा, जो परीक्षा न होने, स्कूल कैम्पस से दूर रहते हुए अपने भविष्य को लेकर क्या सोचते हैं।

बीते साल कई परीक्षाएं घर से बैठकर दी गई। प्रश्न पत्र हाथ में तो उत्तर बताने वाले नोट्स भी। इसके चलते उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत काफी बढ़ा। अब सुझाव आ रहा है कि जिस तरह से मोहल्ला क्लास और पढ़ाई तुंहर द्वार योजना चलाई गई उसी तरह से मोहल्ला परीक्षा और परीक्षा तुंहर द्वार जैसा कुछ करना चाहिये। है तो यह कुछ अजीब सुझाव, लेकिन विचार करते रहने से कोई अच्छा विकल्प तो सामने आ ही सकता है।

वैक्सीन आपूर्ति के दांव-पेंच

छत्तीसगढ़ देश के उन टॉप प्रदेशों में है जहां कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। जिस वैक्सीनेशन अभियान को गति देने में सरकार और प्रशासन को मुश्किल का सामना करना पड़ा, अब लोग उसके लिये बेचैन हैं। किसी भी जिले में मांग के अनुरूप वैक्सीन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है और वैक्सीनेशन लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोग सोच रहे होंगे कि वैक्सीन बनाने वाली कम्पनियां तो मालामाल हो गई होंगी। इधर, कोविशील्ड बनाने वाली कम्पनी सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा है कि उसे उत्पादन बढ़ाने के लिए तत्काल तीन हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है। केन्द्र को कम्पनी ने पत्र लिखकर कंपनी ने कर्ज नहीं, अनुदान मांगा है। कंपनी का कहना है कि ऐसा नहीं है कि हम मुनाफा नहीं कमा रहे हैं पर सरकार के कहने पर हम वैक्सीन बहुत रियायती दर पर दे रहे हैं। ज्यादा उत्पादन के लिये ज्यादा मुनाफा कमाने की जरूरत है। इसलिये अनुदान मिले।

यानि छत्तीसगढ़ ही नहीं, दूसरे राज्य भी जहां कोरोना से जंग लड़ी है सीरम कम्पनी के मालिक उदार पूनावाला की उदारता के भरोसे हैं। वैसे बीच में केन्द्र सरकार है। वही लेन-देन की बात करती है। सवाल महामारी से निपटने का है, कम्पनी की डिमांड का तो कोई न कोई रास्ता वह निकालेगी। वैसे कम्पनी ने यह मांग तब उठाई है जब ब्रिटेन और स्वीडन से उसे आपूर्ति में कमी को लेकर कानूनी नोटिस दी गई है।

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