राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : शराब दुकान या हॉट स्पॉट
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : शराब दुकान या हॉट स्पॉट
05-May-2020

शराब दुकान या हॉट स्पॉट

लॉकडाउन में शराब बिक्री हॉट टॉपिक है। इस फैसले की चौतरफा चर्चा हो रही है। शराब प्रेमी इसके फायदे बता रहे हैं, तो दूसरा तबका इसकी आलोचना कर रहा है। पक्ष-विपक्ष भी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इतना तो तय है कि सरकारें शराब बेचना चाह रही है। उनकी दुविधा यह है कि कोई इसे अपने सिर पर लेना नहीं चाहते। यही वजह है कि राज्य सरकारें केन्द्र का निर्देश बता रही हैं, तो केन्द्र का कहना है कि यह राज्य सरकारों पर निर्भर है। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बस खुलकर शराब बिक्री की वकालत की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाया था।

दरअसल पंजाब जैसे राज्य में शराब खुली संस्कृति का हिस्सा है, इसलिए कैप्टन ने सहजता से अपनी बात रख दी, लेकिन छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों में ऐसी स्थिति नहीं है, यहां पंजाब की तरह खुलकर शराब का चलन नहीं है । परंपराओं और संस्कृति से परे फिलहाल मसला कोरोना संक्रमण का है। जिस तरह से शराब दुकानों में भीड़ उमड़ी उससे तो निश्चित तौर पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। सोशल डिस्टेसिंग को बनाये रखने में छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन बिक्री की व्यवस्था की गई है और दिल्ली में 70 फीसदी का टैक्स लगाया जा रहा है। इन दोनों तरीकों से शराब जैसी सामाजिक बुराई से निपट पाना मुश्किल है। क्योंकि गरीब और मजदूर वर्ग में शराब को लेकर समस्या ज्यादा है। वो ऑनलाइन शराब खरीदेगा इसकी संभावना कम ही दिखती है, लिहाजा भीड़ तो रहने ही वाली है। दूसरी तरफ दाम बढ़ाने से भी असर मजदूर वर्ग पर पड़ेगा और शराब नहीं मिलने से वे हिंसा पर उतारु हो सकते हैं। ऐसे स्थिति में उसके दुष्परिणाम ही ज्यादा नजर आ रहे हैं।

इस बीच एक तथ्य यह भी सामने आया है कि लॉकडाउन के पीरियड में बड़ी संख्या में शराब के आदी इससे दूर हुए हैं। मजदूर और गरीब वर्ग में सुख शांति का वातावरण निर्मित हुआ था। ऐसे में यह समय शराबबंदी की तरफ कदम अच्छा फैसला हो सकता है। क्योंकि दुकान खुलते ही शराब बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि जो लोग शराब से दूर थे, वे फिर से इसकी ओर लौट गए हैं। अलग अलग स्त्रोतों से जो जानकारी मिल रही है उसमें कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों ने बिक्री के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरगुजा जिले के एक आबकारी अधिकारी का दावा है कि उनके जिले में एक दिन में 65 लाख की दारु बिक गई। पूरे प्रदेश में 25 करोड़ की शराब बिक्री की जानकारी मिल रही है।

क्वॉरंटीन में रहने के बजाए

कोरोना संक्रमण के चलते दूसरे राज्यों से आने वाले अफसरों-कर्मियों को 14 दिन तक क्वॉरंटीन में रहना अनिवार्य किया गया है। मगर सरकार के इस निर्देश का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हो रहा है। सरकार के एक निगम के एमडी दो-तीन पहले ही कोरोना संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित राज्य में करीब डेढ़ महीना गुजारने के बाद लौटे हैं। उन्होंने लौटने के बाद क्वॉरंटीन में रहने के बजाए दफ्तर जाना शुरू कर दिया है। वे रोजाना बैठक ले रहे हैं।

सुनते हैं कि अफसर की बैठकों से निगम के बाकी अफसर असहज महसूस कर रहे हैं। वे ज्यादा कुछ नहीं बोल पा रहे हैं।  चर्चा है कि अफसर को अपने तबादले का अंदेशा है। वे प्रतिनियुक्ति पर हैं और उनके विभाग के एक-दो को छोडक़र बाकी अफसर अपने मूल विभाग में जा चुके हैं। ऐसे में अफसर पुराना कोई हिसाब-किताब बाकी नहीं रखना चाह रहे हैं और इन सब वजहों से कोरोना की गाइडलाइन को नजर अंदाज कर ओवरटाईम कर रहे हैं।

पहली बोतल पर सम्मान

महासमुंद से भी एक खबर आई कि वहां की महिलाओं ने शराब की पहली बोतल लेने वाले को माला पहनाकर उसकी फोटो वायरल की। कुल मिलाकर महिलाएं अपने स्तर पर विरोध में उतर गई हैं। एक अलग बात है कि शराबियों पर उसका असर कम ही पड़ा है। वे तो शराब के नशे में सबकुछ भूलकर दारु के जुगाड़ में ही लगे हैं। दुकाने खुलने के पहले ही दिन सोशल मीडिया के जरिए जो रुझान मिल रहे हैं, उससे पता चलता है कि शराब के पक्ष में तरह तरह के दलील पेश कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था इसी से चल रही है तो किसी की दलील है कि शराब से ही विकास संभव है। विकास या बरबादी से बड़ा मुद्दा कोरोना संक्रमण का है, जिसमें सरकार से लेकर आम आदमी की भागीदारी आवश्यक है।

महिलाओं का मोर्चा

ऐसे में साफ है कि लोग शराब का स्टॉक भी कर रहे होंगे। कीमत ज्यादा होने का भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में शराबबंदी का आंदोलन एक फिर जोर पकड़ सकता है, क्योंकि इससे प्रदेश की महिलाएं और बेटियां सर्वाधिक परेशान हैं। घरेलू हिंसा और सडक़ों पर छेड़छाड़ उनकी लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। जांजगीर चांपा के गांव कापन में तो वहां की महिलाओं ने लॉकडाउन के दौरान ही बड़ी संख्या में इक_ा होकर शराब दुकान के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने वहां शराब दुकान खुलने नहीं दी। लाठी-डंडे और बैनर पोस्टर के साथ इन महिलाओं ने पूरे प्रदेश की महिलाओं को संदेश दिया है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने न केवल सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया, बल्कि मास्क लगाकर सुरक्षित तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाई। यहां पुलिस के अधिकारियों ने धारा 144 लगे होने का हवाला देकर गिरफ्तारी तक की चेतावनी दी गई, लेकिन महिलाओं ने अपना प्रदर्शन जारी रखा और दुकान नहीं खुलने दी। दूसरी तरफ पूरे प्रदेश ने उन तस्वीरों को भी देखा है जिसमें पुलिस के जवान धारा 144 के बीच शराब बिकवा रहे थे। ऐसे में कामकाज और परिवार को छोडक़र सडक़ों पर उतरीं उन महिलाओं की पीड़ा को समझा जा सकता है कि शराब के कारण उन्हें किस कदर परेशानी है। यही वजह है कि पुलिसिया धमकी भी बेअसर साबित हुई।

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