राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रामजन्मभूमि से बड़ा विवाद
20-Dec-2020 6:42 PM 281
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रामजन्मभूमि से बड़ा विवाद

रामजन्मभूमि से बड़ा विवाद

माता कौशल्या की जन्मस्थली पर विवाद छिड़ा है। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर इतिहास का हवाला देकर यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि चंदखुरी, माता कौशल्या का जन्म स्थान है। उनका तर्क है कि चंदखुरी का कहीं जिक्र नहीं है बल्कि कोसला का उल्लेख है। हालांकि इस मसले पर उन्हें पार्टी के भीतर आलोचना झेलनी पड़ रही है। बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष श्याम बैस ने तो चंद्राकर की मुख़ालफ़त की है। बावजूद इसके अजय चंद्राकर अपने बयान पर कायम हैं।

अजय चंद्राकर अध्ययनशील हैं, और वे तथ्यों के साथ अपनी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। दो दिन पहले केंद्रीय संस्कृति-पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल रायपुर आए, तो वे पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के निवास पर भी गए। पांडेय निवास मेें बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, सुनील सोनी और एक-दो अन्य नेता भी थे। वहां भी माता कौशल्या के जन्म स्थान पर काफी चर्चा हुई। चंद्राकर ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री पटेल को अलग-अलग पुस्तकों का हवाला देकर यह बताया कि माता कौशल्या  की जन्मभूमि चंदखुरी नहीं, बल्कि कोसला है। जो कि रायगढ़ जिले में स्थित है।

अजय चंद्राकर के तथ्यों से केंद्रीय राज्यमंत्री और वहां मौजूद अन्य नेता सहमत भी नजर आए। दूसरी तरफ, रामवन गमन पथ को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने करीब सवा सौ करोड़ रुपये मंजूर भी किए हैं। अब जन्मस्थली पर विवाद छिड़ गया है।

रमन सिंह अफसरों पर बरसे

पूर्व सीएम रमन सिंह अपने गृह जिले कवर्धा के मंच से अफसरशाही पर जमकर बरसे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अफसरों को तो गिने-चुने दिन रहना है। उन्हें ज्यादा तलवे चाटने की जरूरत नहीं है। आमतौर पर रमन सिंह शालीन नेता माने जाते हैं, लेकिन सरकार जाने के बाद आक्रामक दिख रहे हैं, और कई बार आपा भी खो बैठते हैं। कुछ लोग याद करते हैं कि कांग्रेस शासनकाल में जब रमन सिंह प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी वे उस समय कांग्रेस-सरकार में अफसरशाही का आरोप लगाते थे।

जगदलपुर के एक कार्यक्रम में सरकारी तंत्र के कथित हस्तक्षेप पर उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर एलएन सूर्यवंशी का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोला था, और भाजपा सरकार बनने पर ऐसे अफसरों को देख लेेने की बात तक कही थी। वर्ष-2003 में भाजपा की सरकार बन गई, और सीएम जोगी के करीबी रहे आरपी मंडल, मुकेश गुप्ता, एसआरपी कल्लुरी और एलएन सूर्यवंशी, रमन सिंह के सीएम बनने के बाद ठीक-ठाक पोस्टिंग पा गए।  और तो और, रिटायर होने के बाद सूर्यवंशी को सूचना आयोग के सचिव के पद पर संविदा नियुक्ति भी मिल गई।

भाजपा नेताओं की शिकायत पर मंडल को चुनाव आयोग के आदेश के बाद विधानसभा चुनाव के पहले बिलासपुर कलेक्टर के पद से हटना पड़ा था। मगर रमन सिंह के सीएम बनते ही कुछ दिनों बाद वे रायपुर कलेक्टर बन गए, और रमन सरकार में हमेशा अच्छी पोस्टिंग पाते रहे। भाजपा के एक सबसे बड़े नेता नन्द कुमार साय का पाँव तोडऩे वाली पुलिस के कप्तान रहे मुकेश गुप्ता आगे जाकर रमन सरकार के सबसे ताकतवर पुलिस अफसर बन गए थे.  विधानसभा की कमेटी तक ने उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी, लेकिन रमन राज में वे प्रदेश के सबसे ताकतवर पुलिस अफसर रहे। पुलिस और प्रशासनिक हल्कों में उनकी हैसियत डीजीपी से भी ऊंची मानी जाती थी।

कल्लुरी के खिलाफ कई शिकायतों के बाद भी उन्हें अहम पोस्टिंग मिलती रही। वे बस्तर आईजी रहे। उनकी तारीफों के पुल बांधते हुए  पीएम नरेंद्र मोदी से भी मिलवाया गया था। अब जब रमन सिंह मंच से अफसरों को चेताया है, तो न सिर्फ सरकार बल्कि उनकी अपनी पार्टी के असंतुष्ट लोग पुरानी याद ताजा कर मजे भी ले रहे हैं।

धर्मजीत ने की जब सीएम की तारीफ

गुरु घासीदास जयंती सम्मेलन में लालपुर पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ लोरमी के विधायक धर्मजीत सिंह ठाकुर को भी मंच साझा करने का मौका मिला। उन्होंने अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री की जमकर तारीफ कर लोगों को चौका दिया। धर्मजीत सिंह ने कहा कि सीएम ने दो साल में उनके लोरमी क्षेत्र को बहुत सी सौगातें दी हैं। खासकर एग्रीकल्चर कॉलेज खोलने की मंजूरी के लिये धर्मजीत सिंह ने आभार जताया। यह मान लें कि यह सौजन्यतावश सार्वजनिक मंच से की गई बात थी लेकिन इसके बाद जो हुआ वह ज्यादा चर्चा में है। मुख्यमंत्री से धर्मजीत सिंह ने काफी देर तक अलग से भी बंद कमरे में चर्चा की। लोग इसका मतलब निकालने में लगे हुए हैं, क्योंकि दो दिन पहले ही बिलासपुर में धर्मजीत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मुलाकात की थी। हाल ही में निपटे मरवाही उप-चुनाव में धर्मजीत सिंह की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भाजपा को समर्थन भी दिया था। देखना है कि यह बातें-मुलाकातें किस थाह पर पहुंचेगी। 

संसदीय सचिव की बेफिक्री

संसदीय सचिवों की एक जिम्मेदारी और समझ में आ रही है। वे अपने विभाग की कमियों, गड़बडिय़ों के लिये कवच बनकर खड़े रहेंगे। यदि यदि कोई नौकरशाही के रास्ते से राजनीति में आया हो तो ज्यादा भली-भांति इस जिम्मेदारी को निभा सकता है। ऐसा ही कुछ दिखा जब कांकेर के विधायक रिटायर्ड आईएएस शिशुपाल सौरी मिनी जू कानन पेंडारी के भ्रमण पर पहुंचे। वे वन विभाग के संसदीय सचिव भी हैं। जब पूछा गया कि जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई की घटनायें लगातार सामने आ रही है। जवाब था- पेड़ों की कटाई तो आम बात है, किसी को शिकायत है तो बतायें। मिनी जू में वन्य प्राणियों की लगातार हो रही मौत को लेकर पूछा गया तब भी उनका कहना था कि मौतें तो होती रहती है। ये तो स्वाभाविक घटनाएं हैं। कानन पेंडारी के विकास, विस्तार का काम ठप पड़ा है, पूछने पर कहा कि केन्द्र से राशि अटकी पड़ी है। आगे प्रदेश सरकार की योजना क्या है?, कहा – योजना बना रहे हैं। यानि सब कुछ बढिय़ा चल रहा है।

पहले संगठन, फिर किसान

केन्द्र सरकार और भाजपा ने किसान बिल पर जनसमर्थन जुटाने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चला रखा है। जगह-जगह सभा सम्मेलनों, महापंचायतों के जरिये प्रदेश में भी भाजपा यही कर रही है। बाकी कसर प्रशिक्षण शिविरों से पूरी की जा रही है। अनुशासन में बंधी पार्टी के लिये ऊपर से आया आदेश ही महत्वपूर्ण है। वह यही कर रही है। दिसम्बर की ठंड में छत्तीसगढ़ के किसानों के धान बेचने में पसीने छूट रहे हैं। कहीं रकबा कम है, कहीं तौल में गड़बड़ी हो रही है, कहीं बारदानों की कमी है तो कहीं खरीदी ही रोक दी गई है। लोग कह रहे हैं, विपक्ष में होने के नाते किसानों की आवाज उठाना भाजपा की प्राथमिकता में होनी चाहिये। पर दिल्ली में रिपोर्ट कार्ड ठीक बनाये रखने के लिये किसान कानून पर उन्हें भाषण पिलाया जा रहा है। अब यहां जो किसान कानून का मामला है, ज्यादातर उपज खरीद ली जा रही है। नये कानून का क्या असर होने वाला है इसकी ज्यादा परवाह अभी किसान कर भी नहीं रहे हैं। उनकी असल चिंता है, धान समय पर बिना परेशानी बिक जाये और भुगतान मिल जाये। कांग्रेस सरकार और धान खरीदी में लगे तंत्र के लिये अच्छा है कि भाजपा किसान की नहीं, किसानों के केन्द्रीय कानून की ज्यादा परवाह करती रहे।

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