राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : एस के मिश्रा नाबाद
02-Feb-2021 5:55 PM 256
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : एस के मिश्रा नाबाद

एस के मिश्रा नाबाद

पूर्व सीएस एस के मिश्रा ऐसे अफसर हैं, जो कि रिटायर होने के 17 साल बाद भी अब तक रिटायर नहीं हुए। यानी सरकार उन्हें एक के बाद एक जिम्मेदारी सौंपती गई, और वे बखूबी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे। मिश्रा वर्ष-2004 में सीएस पद से रिटायर होने के बाद राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन बने। नियामक आयोग के चेयरमैन का कार्यकाल पूरा होने के बाद वे वित्त आयोग के चेयरमैन बनाए गए। बाद में उन्हें प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया।

पिछली सरकार ने ब्लॉक-तहसील के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन किया था। जिसके चेयरमैन भी एसके मिश्रा बनाए गए। यही नहीं, सरकार ने इंड्रस्टियल डेवलपमेंट पर सुझाव देने के लिए कमेटी बनाई थी, जिसके चेयरमैन भी एसके मिश्रा रहे। वर्तमान में मिश्रा दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय आश्रय स्थल निगरानी समिति के चेयरमैन का दायित्व निभा रहे हैं। कुल मिलाकर वे सरकारी कामकाज से आज भी निवृत्त नहीं हुए हैं।

मिश्रा अपने प्रशासनिक कैरियर में बेदाग रहे। यद्यपि रमन सरकार के पहले कार्यकाल में तत्कालीन प्रमुख सचिव पीएस राघवन ने एक दफा उन पर खुले तौर पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन मिश्रा खामोश रहे।  ये अलग बात है कि बाद में राघवन को लूपलाइन में जाना पड़ा। बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए। मिश्रा अनुभवी होने के साथ-साथ बेहद सुलझे हुए अफसर माने जाते हैं, और लो प्रोफाइल में रहते हैं। यही वजह है कि सरकार चाहे कोई हो, वे हमेशा महत्वपूर्ण बने रहे।

रामबाई फेल हो गई, हमारी पोरा तो टॉप थी

सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय रहने वाले आईपीएस दीपांशु काबरा को दमोह पथरिया (मध्यप्रदेश) की विधायक राम बाई के दसवीं कक्षा में फेल हो जाने का अफसोस है। उन्होंने ट्विटर पर अपनी भावना साझा की है और उनके पूरक परीक्षा में सफल हो जाने की कामना की है। बहुत सी लड़कियां हैं जो बचपन में घरेलू और सामाजिक माहौल नहीं मिलने की वजह से स्कूल नहीं जा पातीं। पिछड़े और दलित समाज में तो स्थिति और भी बुरी होती है। शिक्षा की अहमियत जानकर रामबाई ने दसवीं पास करने का तो सोचा, पर शायद विधायक की जिम्मेदारी होने की वजह से तैयारी ठीक तरह से नहीं कर पाई। ओपन बोर्ड की परीक्षा को कुछ आसान समझा जाता है, ज्यादातर लोग इसमें पास हो जाते हैं। रामबाई को अगर पूरक रिजल्ट मिला तो समझा जा सकता है कि कितनी ईमानदारी से परीक्षा ली गई और कॉपियां जांची गई। अपने यहां पोराबाई का उदाहरण है जो शिक्षकों की मेहरबानी से 99 प्रतिशत नंबर हासिल कर पूरे प्रदेश में टॉप पर थी। रामबाई को दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने पॉवरफुल विधायक रहते हुए भी पोराबाई जैसा तरीका नहीं अपनाया।

नेताओं के बच्चों को जगह नहीं?

चर्चा है कि भाजयुमो की कार्यकारिणी में नेता पुत्रों को जगह नहीं दी जा रही है। भाजपा के एक प्रभावशाली नेता के पुत्र को तो कोषाध्यक्ष बनाने पर तकरीबन सहमति बन भी गई थी। पूर्व सीएम ने भी इसके लिए सिफारिश की थी। इसके अलावा पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा के पुत्र लवकेश पैकरा, रामविचार नेताम की पुत्री, प्रेमप्रकाश पाण्डेय के पुत्र मनीष और नारायण चंदेल सहित कई और नेताओं के बेटे-बेटियों को कार्यकारिणी में जगह मिलने की चर्चा रही।

कुछ तो सक्रिय भी हैं, और अपने इलाके में पकड़ भी रखते हैं। मगर हाईकमान ने निर्देश दिए हैं कि 35 साल से अधिक उम्र वाले को किसी भी दशा में युवा मोर्चा का पदाधिकारी न बनाया जाए। इसके चलते कुछ नेता पुत्र स्वमेव बाहर हो गए। बाद में यह भी निर्देश आया कि किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी के बेटे-बेटियों को कार्यकारिणी में जगह न दी जाए। फिर क्या था, बचे-खुचे भी बाहर हो गए। हालांकि अभी भी एक-दो नाम को एडजस्ट करने के लिए कोशिशें चल रही हैं। देखना है आगे क्या होता है।

रिकॉर्ड धान खरीदी पर वाह-वाह, भुगतान पर?

रिकॉर्ड धान खरीदी के चलते प्रदेश सरकार को बड़ी वाहवाही मिल रही है पर खरीदी की रकम हासिल करने के लिये किसानों के मुंह से आह निकल रही है। तकनीकी रूप से खाते में रकम आ गई है पर बैंक पूरी रकम निकालने नहीं दे रहे हैं, ऐसी कई जगहों से शिकायतें हैं। जशपुर जिले की घटना तो ज्यादा मार्मिक है। एक वृद्धा फरसाबहार के पास के गांव से 90 किलोमीटर चलकर जशपुरनगर पहुंची। घंटो बैठने के बाद भी उसे रकम नहीं मिली। उसने 9 दिसम्बर और 19 जनवरी को दो बार में 55 क्विंटल धान बेचा था, पर खाते में रकम आ जाने के बावजूद अपेक्स बैंक ने चार दिन बाद आने कहा। वृद्धा ने कहा एटीएम कार्ड ही दे दो, अपने आसपास से रकम चार दिन बाद निकाल लेगी। बैंक अधिकारियों ने बताया कि वह तो चार महीने बाद मिलेगा। खाते में पैसे होने के बावजूद भुगतान नहीं करने की वजह क्या हो सकती है? जब सारे निजी और राष्ट्रीयकृत बैंक बैंकों में भीड़ कम करने के लिये एटीएम कार्ड की व्यवस्था हो चुकी है, सहकारी और अपेक्स बैंक शाखायें पीछे हैं। चेन में कहां गड़बड़ी है ये राजधानी के अफसरों को देखना होगा। 

ऑललाइन क्लास लेने में कोताही, नोटिस अब

बच्चों को पढ़ाने में कोताही बरतने को लेकर अक्सर शिक्षा कर्मियों को ही निशाने पर लिया जाता है। लेकिन कॉलेजों का हाल भी कुछ कम बुरा नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने हाल ही में रायपुर संभाग की समीक्षा बैठक ली तो पता चला कि अनेक प्राध्यापक ऑनलाइन क्लासेस नहीं ले रहे हैं। कोरोना के कारण बंद कक्षाओं की भरपाई के लिये उन्हें घर पर बैठकर ही ऑनलाइन पढ़ाई करानी थी, पर सहूलियत के साथ हो जाने वाले इस काम में भी उनकी दिलचस्पी नहीं दिखी। क्लासेस चलती रहें इस पर निगरानी प्राचार्यों को करनी है, जो उन्होंने नहीं की। इसके चलते करीब दर्जन भर प्राचार्यों को नोटिस दी गई है। नोटिस तब दी गई है जब सत्र का लगभग समापन हो चुका है। छात्रों को जो नुकसान होना है वह हो चुका है। वे अपने से पढक़र इस बार परीक्षा देंगे। अब तो नये सत्र से कॉलेजों को खोलने का फैसला भी लिया जा चुका है। कोरोना आराम करने का एक अवसर था, जो जाने वाला है।

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