राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : राजनीति के फायदे, सेंगर से लेकर यहां तक...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : राजनीति के फायदे, सेंगर से लेकर यहां तक...
Date : 05-Aug-2019

देश में कानून दो अलग-अलग किस्म का लागू है। एक आम लोगों के लिए रहता है जिनकी हालत आम की चूसी हुई गुठली सरीखी रहती है। दूसरा कानून खास लोगों के लिए रहता है जिसमें यूपी के बीजेपी एमएलए सेंगर सरीखे लोग आते हैं जहां तक कानून के पहुंचने के पहले उनके विरोधियों को मौत आ जाती है। 

छत्तीसगढ़ में भी ताकतवर लोगों को कानून छू नहीं पाता है। और यह ताकत जरूरी नहीं है कि सत्ता की ही हो, विपक्ष की भी अपनी ताकत होती है, और इसीलिए बहुत से लोग सत्ता या विपक्ष किसी की भी राजनीति में शामिल हो जाना चाहते हैं ताकि अफसरों पर रौब पड़ सके। अब ऐसा ही रौब एक विपक्षी दल के एक नेता का है जो कि फिल्मों से भी जुड़े हुए हैं। उनकी फिल्म में हीरोईन रह चुकी एक महिला ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि वे उसे टेलीफोन पर अश्लील संदेश भेज-भेजकर परेशान करते हैं, दोनों ही शादीशुदा हैं, लेकिन फिर भी नेताजी उसे अपने से शादी करने पर मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं, और इस अभिनेत्री की बहन को भी संदेश भेजकर, फोन पर धमकाकर परेशान कर रहे हैं। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में लिखाया गया है कि उसके साथ जबर्दस्ती करने की भी कोशिश की गई है। आईटी एक्ट और दूसरी गंभीर दफाओं में दर्ज इस मामले में पुलिस अदालत में जा चुकी है, लेकिन सब कुछ बड़ी धीमी रफ्तार से चल रहा है। हालत यह है कि मोबाइल फोन पर संदेश जैसे सुरक्षित सुबूतों के बाद भी मामला किसी किनारे पहुंच नहीं रहा है। राजनीति में रहने के फायदे बहुत होते हैं। 

जंगल में तरक्की के रास्ते खुले...
सरकार ने पीसीसीएफ के दो और पद मंजूर करने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। इसके बाद पीसीसीएफ के कुल 6 पद हो जाएंगे। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द ही केन्द्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा। केन्द्र की मंजूरी के बाद अतिरिक्त पीसीसीएफ के पद पर आरबीपी सिन्हा और संजय शुक्ला को पदोन्नति मिल सकती है। हालांकि इसमें दो-तीन माह का समय लग सकता है। 

पीसीसीएफ के दो अतिरिक्त पद की स्वीकृति दो साल के लिए मिली थी। यह समय सीमा 31 मार्च को खत्म हो गई थीं। इसके बाद सरकार ने दोबारा प्रस्ताव केन्द्र को नहीं भेजा। अतिरिक्त पद न होने से वर्ष-85 बैच के एपीसीएफ पीसी मिश्रा बिना पीसीसीएफ बने  रिटायर हो गए। जबकि उन्हीं के बैच के अफसर राकेश चतुर्वेदी और कौशलेन्द्र सिंह वरिष्ठता क्रम में ऊपर होने के कारण पीसीसीएफ हो गए।

सुनते हैं कि सीएम भूपेश बघेल अतिरिक्त पद बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इसके औचित्य को लेकर जवाब-तलब भी किया था, लेकिन बाद में विभागीय मंत्री मोहम्मद अकबर के कहने पर अनमने मन से इसकी मंजूरी दे दी। अब आरबीपी सिन्हा और संजय शुक्ला को इससे सीधा फायदा हो सकता है। अन्यथा उन्हें पदोन्नति के लिए कम से कम डेढ़ साल इंतजार और करना पड़ता। 

कल आया, आज घर सम्हाल बैठा...
भाजयुमो के कई पदाधिकारी पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह से नाराज चल रहे हैं। पदाधिकारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि  पूर्व सीएम के कहने पर पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी को पार्टी कार्यक्रमों के मंच पर बिठाया जा रहा है और उन्हें एक तरह से उनके साथ अतिथि की तरह सम्मान दिया जा रहा है। जबकि वे विधानसभा चुनाव के जरा पहले ही पार्टी में आए हैं। 

भाजयुमो नेताओं का यह भी कहना है कि रमन सिंह, ओपी चौधरी को भाजयुमो अध्यक्ष बनवा सकते हैं। मौजूदा अध्यक्ष विजय शर्मा, पूर्व सीएम के ही करीबी हैं और वे हर कार्यक्रम में योजनाबद्ध तरीके से सबसे पहले ओपी चौधरी को संबोधन के लिए आगे करते हैं। कुछ पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत पार्टी के अन्य वरिष्ठ विधायकों से की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पूर्व सीएम की पसंद पर धरमलाल कौशिक को अंतिम क्षणों नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। उसी तरह चौधरी को भी भाजयुमो का अध्यक्ष बनाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन इसका विरोध अभी से शुरू हो गया है।  

आईएएस अफसर सोनमणि बोरा ने सोशल मीडिया में विदेश यात्रा से लौटने के बाद माना विमानतल में नेताओं जैसे स्वागत की तस्वीर पोस्ट की है। सचिव स्तर के अफसर सोनमणि अमेरिका अध्ययन यात्रा पर गए थे। वे सालभर बाद रविवार को लौटे हैं।

 

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