संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 08 फरवरी : पड़ोसी देशों के लिए भारत का सही रूख
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 08 फरवरी : पड़ोसी देशों के लिए भारत का सही रूख
Date : 08-Feb-2020

पड़ोसी देशों के लिए भारत का सही रूख

कुछ दिन पहले जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह सलाह दी कि हिंदुस्तान वायरसग्रस्त चीन से अपने छात्रों और बाकी नागरिकों को निकलने के साथ-साथ पाकिस्तान के छात्रों को भी निकालने में मदद करे तो भारत में कई लोग उबल पड़े। दुश्मन करार दिए गए देश के लोगों की मदद क्यों की जाए? फिर खुद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने वायरस के खतरे के बाद भी चीन से एकजुटता दिखाने के लिए पाकिस्तानी छात्रों को वहां से वापिस लाने से इंकार कर दिया। जान के खतरे से घिरे पाकिस्तानी छात्र इस पर अपने प्रधानमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिख भी रहे हैं। 

ऐसे में भारतीय विदेश मंत्री का यह बयान मायने रखता है कि भारत सरकार अपने पड़ोसी तमाम देशों के छात्रों को वायरसग्रस्त चीनी प्रांत वुहान से निकालने और भारत लाने के लिए तैयार है। पड़ोसी देशों में से खासकर पाकिस्तान के साथ भारत के जैसे बुरे रिश्ते चल रहे हैं, उसके बीच भारत का यह प्रस्ताव मायने रखता है। फिर चाहे इसके पीछे उसकी मंशा पाक नागरिकों के बीच इमरान खान को लेकर छवि प्रभावित करने की भी क्यों न हो। अगर ऐसा होता है तो पाक छात्रों को निकालकर हिफाजत से हिंदुस्तान लाना और उन्हें अस्पतालों में रखना पूरी दुनिया में नोटिस किया जाएगा।

आज जाहिर तौर पर हिंदुस्तान अपने तमाम पड़ोसी देशों में चीन के तुरंत बाद का सबसे बड़ा देश है। और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति उसकी बड़ी जवाबदेही भी बनती है। नेहरू के वक्त से हिंदुस्तान बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण सामुदायिक जवाबदेही निभाते भी आया है और भारत को असाधारण अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिलते रहा है। आज नेहरू चाहे इस देश के मौजूदा इतिहास पुनर्लेखन में अवांछित खलनायक करार दिए जा रहे हों, लेकिन सैकड़ों बरस बाद भी यह देश नेहरू की दरियादिली और महानता को भूल नहीं सकेगा।

इसलिए आज भारत सरकार का प्रस्ताव, अपनी किसी भी घोषित या अघोषित नीयत से परे, नेहरू की नीति के अनुकूल है। आज चाहे बांग्लादेश आर्थिक पैमानों पर भारत से ऊपर दिख रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि बांग्लादेश भारत की ऐसी क्षमता का मुकाबला नहीं कर सकता। यह भी याद रखने की जरूरत है कि पिछली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किस तरह पाकिस्तान के मरीजों के भारत में इलाज में मदद की थी। जरा-जरा सी ट्वीट पर भी वे ऐसे इंतजाम करती थीं।

किसी देश में आम जनता की सद्भावना पाने का सबसे अच्छा जरिया होता है वहां के मुसीबतजदा लोगों की मदद करना। भारत का ऐसा करने का एक लंबा इतिहास रहा है। नेहरू के वक्त से पड़ोसी देशों के लोगों को स्थायी शरण दी जाती रही है और 1971 में तो इंदिरा गांधी ने शायद विश्व इतिहास की सबसे बड़ी शरण दी थी जब पूर्वी पाकिस्तान से आए लाखों लोगों को उन्होंने बसाया। भारत को पड़ोसियों, और बाकी लोगों की मदद का सिलसिला जारी रखना चाहिए। 

-सुनील कुमार

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